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वर्तमान में अध्यापन की समस्याएँ

सारांश

यद्यपि फोन, कम्प्यूटर, टेलीविजन आदि द्वारा अध्यापकों ने छात्रों को शिक्षित करने का जटिल व मुश्किल प्रयास किया परन्तु यह प्रयास उतना सार्थक व उपयोगी सिद्ध नहीं हो सका जितनी इसकी अपेक्षा की गई थी। इस असफलता के कारण बहुत थे जैसे, सभी विद्यार्थियों के पास जरूरी उपकरणों का न होना, बिजली या इंटरनेट का न होना आदि आदि। इस प्रयास में असफलता तो मिली ही अपितु इस व्यवस्था ने तो एक अलग ही प्रकार की कुव्यवस्था का भयंकर रूप धारण कर लिया। बच्चे इंटरनेट के न केवल आदि हो गए बल्कि शिक्षा के अतिरिक्त अन्य गैर जरूरी सामग्री की जद में आकर अपना और अधिक नुकसान करने लगे। आंखों की बीमारियाँ लगने लगी व मानसिक विकार भी डराने लगे हैं। कहने का तात्पर्य यही है कि ये वैकल्पिक व्यवस्था ही अंततः जी का जंजाल बन गई जिसमें हमारे नौनिहाल पिसते नजर आ रहे हैं अर्थात फायदे की जगह हानि ही सर्वत्र अधिक हुई है।

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