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वैश्वीकरण के दौर में हिन्दी की महत्ता व संभावना
Hindi's usefulness and potential in the era of globalization

राजपाल, कुमार संदीप

सहायक प्रोफेसर, राजकीय महाविद्यालय, हिसार, हरियाणा

सहायक प्रोफेसर, दर्श मॉडल, डिग्री कॉलेज सोनीपत हरियाणा

Rajpal, and Kumar, Sandeep

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सारांश

भाषा भावाभिव्यक्ति तथा सम्प्रेषण का एक सशक्त तथा महत्वपूर्ण माध्यम है। भाषा के अभाव में भाव उसी प्रकार लगते है जैसे आत्मा के बिना शरीर।  विकास एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जो कभी धीमी गति से तो कभी तीव्र गति से सामने आती है। जिस प्रकार मनुष्य की विकासावस्था विविध उतार-चढ़ावों का परिणाम है उसी प्रकार भाषा भी विभिन्न रूपों में प्रवाहित होती रही है। आरम्भ में जहाँ वह संकेतों के द्वारा अभिव्यक्ति का माध्यम बनी वहीँ आगे चलकर मौखिक और फिर लिखित शब्दों के रूप में सामने आयी। उसी प्रकार अपने साथ घटित किसी घटना को बताने के लिए उसने जिस माध्यम का सहारा लिया होगा वह कहानी के रूप में सामने आया होगा। अभिप्राय यह है कि आरम्भ में विभिन्न स्थितियों के गीत, कहानी, नीति-वाक्य, पहेलियाँ, भजन, स्वांग तथा नाटक आदि मौखिक साहित्य के रूप में सामने आया, तदुपरांत विभिन्न विकसावस्थाओं को पार करते हुए वह लिखित साहित्य के रूप में आया। 

Abstract

Language is a vital and important medium of expression and communication. Same feeling in absence of language looks like a body without a soul. Development is a continuous process which is sometimes slow and sometimes slow.
Just as human development is the result of various ups and downs, similarly language also keeps flowing in different forms. In the beginning the medium of expression was created through living signs and then later, she appeared in the form of “Oral” and then in the form of “Written” children.

In the same way, you will torture any abomination associated with you. Therefore, whatever medium he used, it would have come out in the form of a story. It means, it came in beginning in the form of oral literature like songs, stories, proverbs, riddles, hymns, songs and dances etc. for different situations, then passed through different stages of development and came in the form of separate literature.



Cite this article

राजपाल, और कुमारसंदीप. (2022). वैश्वीकरण के दौर में हिन्दी की महत्ता व संभावना. Shodh Sari-An International Multidisciplinary Journal, 01(01), 39–48. https://doi.org/10.5281/zenodo.7747810

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